खिलौने वाला कविता - सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित सारांश/ व्याख्या सहित KHILONEWALA - Subhadra Kumari Chauhan poem summary in hindi
KHILONEWALA - Subhadra Kumari Chauhan| Subhadra kumari chauhan poem summary in hindi|खिलौने वाला कविता - सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित सारांश/ व्याख्या सहित << खिलौनेवाला >> सुभद्राकुमारी चौहान > >>कविता<< •~•~•~•~•~•~•~•~• वह देखो माँ आज खिलौनेवाला फिर से आया है। कई तरह के सुंदर-सुंदर नए खिलौने लाया है। हरा-हरा तोता पिंजड़े में गेंद एक पैसे वाली छोटी सी मोटर गाड़ी है सर-सर-सर चलने वाली। सीटी भी है कई तरह की कई तरह के सुंदर खेल चाभी भर देने से भक-भक करती चलने वाली रेल। गुड़िया भी है बहुत भली-सी पहने कानों में बाली छोटा-सा 'टी सेट' है छोटे-छोटे हैं लोटा थाली। छोटे-छोटे धनुष-बाण हैं हैं छोटी-छोटी तलवार नए खिलौने ले लो भैया ज़ोर-ज़ोर वह रहा पुकार। मुन्नू ने गुड़िया ले ली है मोहन ने मोटर गाड़ी मचल-मचल सरला करती है माँ से लेने को साड़ी कभी खिलौनेवाला भी माँ क्या साड़ी ले आता है। साड़ी तो वह कपड़े वाला कभी-कभी दे जाता है अम्मा तुमने तो लाकर के मुझे दे दिए पैसे चार कौन खिलौने लेता हूँ मैं तुम भी मन में करो विचार। तुम सोचोगी ...